भारतीय परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र एक ऐतिहासिक बदलाव के मुहाने पर खड़ा है। अब तक इलेक्ट्रिक वाहनों की चर्चा केवल कारों और दोपहिया वाहनों तक सीमित थी, लेकिन 2026 में भारी-भरकम ‘इलेक्ट्रिक ट्रकों’ ने इस धारणा को बदल दिया है। टाटा मोटर्स, अशोक लेलैंड और मोंट्रा इलेक्ट्रिक जैसे दिग्गज अब ऐसे ट्रक बाजार में उतार रहे हैं जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि परिचालन लागत (Operating Cost) के मामले में भी डीजल ट्रकों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
सरकार की नई PM E-DRIVE योजना इस क्रांति में ईंधन का काम कर रही है। इस योजना के तहत भारी इलेक्ट्रिक ट्रकों की खरीद पर ₹9.6 लाख तक की सीधी सब्सिडी मिल रही है, जिससे इनकी शुरुआती ऊंची कीमत का बोझ कम हो गया है। सीमेंट, खनन और ई-कॉमर्स जैसी बड़ी कंपनियां अब अपने बेड़े में इलेक्ट्रिक ट्रकों को शामिल कर रही हैं। हाल ही में अल्ट्राटेक सीमेंट ने भारत का पहला PM E-DRIVE प्रमाणित भारी इलेक्ट्रिक ट्रक अपने बेड़े में शामिल कर एक नई शुरुआत की है।
तकनीकी रूप से, ये ट्रक अब पहले से कहीं अधिक सक्षम हैं। उदाहरण के लिए, मोंट्रा इलेक्ट्रिक का राइनो 5538 EV जैसे मॉडल्स 380 HP की शक्ति और लगभग 200 किमी की रेंज के साथ आते हैं। सबसे बड़ी सफलता ‘बैटरी स्वापिंग’ (Battery Swapping) तकनीक में मिली है, जिससे भारी ट्रकों की बैटरी को मात्र 6 मिनट में बदला जा सकता है। यह तकनीक लंबी दूरी की रसद के लिए एक वरदान साबित हो रही है क्योंकि इससे चार्जिंग में लगने वाला समय डीजल भरवाने जितना ही कम हो गया है।
आर्थिक दृष्टि से देखा जाए तो, हालांकि इलेक्ट्रिक ट्रकों की शुरुआती कीमत अधिक है, लेकिन इनका प्रति किलोमीटर खर्च डीजल के मुकाबले 60-70% तक कम है। कम पुर्जों के कारण इनके रखरखाव (Maintenance) का खर्च भी बहुत कम होता है। जैसे-जैसे भारत में ‘ग्रीन कॉरिडोर’ विकसित हो रहे हैं, राजमार्गों पर चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाया जा रहा है, जिससे अंतर-राज्यीय परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक ट्रकों का उपयोग अब एक व्यावहारिक वास्तविकता बन गया है।
सुरक्षा और आराम के मामले में भी ये नए इलेक्ट्रिक ट्रक ड्राइवरों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। शोर और कंपन की अनुपस्थिति ड्राइवरों की थकान को कम करती है, जिससे सड़क सुरक्षा में सुधार होता है। साथ ही, इनमें ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) और स्मार्ट टेलीमैटिक्स जैसे फीचर्स दिए जा रहे हैं, जो बेड़े के मालिकों को हर समय वाहन की स्थिति और बैटरी की सेहत पर नजर रखने की सुविधा देते हैं।
निष्कर्षतः, 2026 भारत में ‘क्लीन फ्रेट’ (Clean Freight) के युग की शुरुआत है। आने वाले वर्षों में, हम देखेंगे कि कैसे ये खामोश विशालकाय ट्रक हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेंगे और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करेंगे। यदि आप एक लॉजिस्टिक व्यवसाय चलाते हैं, तो यह सही समय है कि आप भी इस टिकाऊ और किफायती भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं।
